अम्मी के गुजर जाने के बाद नादिया की पढ़ाई रुक गई थी। लगा जैसे वो अब्बू के लिए बोझ हो गई हो। दसवीं तक आते– आते उसकी शादी करवा दी गई, तब वो सिर्फ पंद्रह साल की थी, और दसवीं भी पूरा नहीं कर पाई। शादी भी जिससे हुई वो उससे दस साल बड़ा था। अपने नाम की ही तरह वो भी बहुत कोमल थी, पढ़ाई छूटने पर बहुत दुखी हुई थी, अपनी अम्मी से उसने बहुत कुछ सीखा था या यों कहें की वो समय से पहले ही समझदार हो गई थी, बस दुख इस बात का था की उसकी समझदारी को पंख नहीं मिल पाया कभी। ससुराल में अक्सर अफ़ज़ल उसको पीटा करता था, उसके साथ बुरा बर्ताव किया करता था, घर के हालात खस्ताहर थे, सारे पैसे शराब में उड़ाए जा रहे थे । सोलहवें साल में होते–होते नादिया ने एक बेटी को जन्म दिया, जन्म देते हुए भी वो मरते –मरते बची। अब नन्ही नादिया मां बन चुकी थी, भला सोलह साल में मां कौन बनता है फिर भी उसका ममत्व जाग चुका था, अब वो कहीं दूर जाना चाहती थी जहां अपनी लड़की का आने वाला भविष्य सुधार सके। अफजल का पागलपन बढ़ता जा रहा था , उसके हाथ सिर्फ नादिया को पीटते ही नही थे बल्कि उस मासूम बच्ची को झकझोरा भी करते थे, और वो डरी सहमी, अपन...
# IT'S ABOUT THE EXISTENCE.

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